वो कहते हैं न दार्शनिक या धर्मगुरू किसी विशेष जाति या धर्म को नहीं मानते हैं। उनका एक ही धर्म होता है। वह है मानवता का धर्म, इंसानियत का धर्म, प्रेम का धर्म। भटके हुए को राह दिखाना, मानव सेवा करना उनका सबसे बड़ा धर्म होता है।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित अन्य धर्मों को भेद-भाव रहित जीवन जीने की प्रेरणा देने वाले, समाजिक कार्यकर्ता और हैदराबाद निवासी नजम काजी समाज के लिए एक ऐसे उदाहरण हैं। जो लगभग सभी धर्मों में प्रेरणा का स्त्रोत हैं। भ्रमण पर शांतिकुंज आये नजम काजी ने प्रज्ञा अभियान पत्रिका को बताया कि हमने लगभग सभी धर्मों का गहन अध्ययन किया है। मुझे सभी धर्म समान मालूम पड़ते हैं। किसी में मुझे भेदभाव नहीं दिखायी देता है। सभी का एक ही मालिक है। सिर्फ नाम अलग-अलग हैं। कुरान पर चर्चा करे हुए नजम कहते हैं कि गाय को माँ कहा गया है। उनकी रक्षा और देखभाल करने के लिए जिक्र किया गया है। पर अफसोस इस बात का है कि कुछ मुस्लिम लोगों ने गलत कार्य और नकारात्मकता फैलाने का कार्य किया है। जिससे मुस्लिम समाज की छवि धूमिल हुई है।
शांतिकुंज के वरिष्ठ मनीषी आदरणीय वीरेश्वर उपाध्याय जी से मुलाकात के दौरान नजम काजी ने तमाम पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान शांतिकुंज मनीषी ने गुरूदेव साहित्य भेंट कर उन्हें अखिल विश्व गायत्री परिवार के बारे उनको परिचित कराया। इस बातचीत के दौरान गुरूदेव की एक पुस्तक पढ़ी तो हैरादाबाद निवासी नजम काजी अभिभूत हो गये और उन्होंने गुरूदेव रचित बहुत सारा साहित्य खरीद लिया। साहित्य से इतने प्रभावित हुए और बोले कि आगामी समय में हैदराबाद में प्रस्तावित अश्वमेघ यज्ञ में हम पुस्तक मेला लगायेंगे। नजम काजी का उददेश्य है कि समाज में फैलायी जा रहीं भ्रंतियों और नकारात्मकता को जड़ से खत्म करना और सकारात्मकता का प्रचार करना। तभी राष्ट्र खुशहाली की ओर बढ़ सकता है।

©Rachit Singh

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