कल तु मुझे से प्यार करता था
आज मे तुझ से प्यार करती‌ हूँ
कल तु मेरा इंतजार कर रहा था
आज मै तेरा इंंतजार करती हूँ -2
कल .. . . . . . . . . . . . . . . . . . करती हूँ

यू नही ठुकरना चाहिए गालिब ,
रहो मे चलतें प्यार को -2
आज मे प्यार की‌ अहमीयत समझती हूँ -2
कल ………………………………….करती हूँ

खो ना जाए यें दिल के रिशतें -2
दिल से प्यार करती‌ हूँ
हो जाए खता गालिब खफा मत होना
प्यार की खता को प्यार की राह समझती हूँ -2
कल. .. .. .. . . . . . .. . . . . . . . . करती‌ हूँ

खता से सिख आगें राह में बढ़़ती हूँ
प्यार को कभी खता नहीं समझना
ऐ गालिब प्यार को रोहो में ठुकराना खता समझती हूँ .
कल करती हूँ

Dr Brahmanand jaalap

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