सारी उम्र गवां दी

सारी उम्र गवां दी

सारी उम्र गवां दी मैने तुमको अपना बनाने में
है इतना दर्द भरा न फ़र्क बचा जीने और मरने में..

जिसके लिए हम दर-दर भटके हर पल तरसे
वो क़म्बख्त सुकूँ मिला होकर तन्हा मयखाने में..

इश्क़ के नाम पर बची है फ़क़त जिस्म की चाहत
हीर-राँझा रोमियो-जूलियट सब होते हैं सिर्फ़ फ़साने में..

किस पर ऐतबार करें यहाँ किसको अपना माने हम
हर तरफ़ झूठ का कारोबार है फ़रेबी भरे पड़े हैं ज़माने में ..

मतलब की है दुनियां मतलब से ही हर कोई साथ है
सारे रिश्ते झूठे निकले सबकुछ लुटा दिया जिनको निभाने में…

आरती ‘अक्स’

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Aarti Human

अब हाल-ए-दिल ना पूँछ कि ताब-ए-बयाँ कहाँ अब मेहरबान ना हो कि जरूरत ना रही....

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