मेरा बचपन मुझे अब याद आता है
वो सुबह जल्दी से विद्यालय जाना
विद्यालय पहुंच कर इंटरबेल का इन्तेजार करना
और घंटी लगते ही जोर से चिल्लाना…
खाने क्या क्या लाए है यह सब से पूछना
वो संग मिल बांट के खाना याद आता है
मेरा बचपन मुझे अब याद आता है

हम वहां क्यो पढ़ रहे है
ये हमें भी ना पता होता था
अपना उद्देश्य तो
दोस्तो संग मस्ती करना होता था
न किसी से द्वेष ना भेद भाव होता था
यही वो दिन थे जब दुखों का अभाव होता था
खुशियों से भरे उन दिनों में कुछ दोस्त अपने खास थे
कुछ दिल से थोड़ा दूर कुछ दिल के बहुत पास थे
हर रोज मिलते आपस में हर रोज लड़ते थे
याद है वो दिन जब साथ मे सब मस्ती करते थे
रोज का लड़ना झगड़ना याद आता है
मेरा बचपन मुझे अब याद आता है

छुट्टी होने पर जोर से चिल्लाना
और बस्ता लेकर घर की तरफ भागना
घर आते ही भूख भूख चिल्लाना
खाना खाते ही मां से खेलने की इजाज़त मांगना
और बिगड़े को लेकर बनाने की कोशिश करना
आज वो बिगड़ा खिलौना याद आता है
मेरा बचपन मुझे अब याद आता है

आज पैसा कमाने कि दौड़ में ना जाने वो खुशियां कंहा गुम हो गई हैं
अपनी खुशियों को तो जैसे किसी की नज़र लग गई है
दिन भर दिमाग को पैसा और मन को भविष्य की चिंता सता रही है
अपनी खुशियां तो जैसे कहीं दूर चली गयीं हैं
आम है अब कई बार बिना मुस्कुराए ही शाम हो जाना
ना जाने कहाँ गुम है वो हंसकर उठने का जमाना
आज वो गुजरा जमाना याद आता है
मेरा बचपन मुझे बहुत याद आता है…दिलीप

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