अँधेरा है हर रास्ते मेँ!
पर चलना तो मुझे ही होगा ,
मुश्किले है मुसीबते है ,
पर लड़ना तो मुझे ही होगा,
दिख रही न कोई रोशनी,
पर चलना तो मुझे ही होगा,
प्रतिकूल परिस्थितियों है
पर भिड़ना तो मुझे ही होगा,
खो गया हूँ इस जीवन के मेले मेँ,
पर राह ढूँढना तो मुझे ही होगा,
रस्ते मेँ बहुत बांधाये है,
पर इसे हटाना तो मुझे ही होगा,
मेरे अंदर बहुत सारी कमियाँ है,
पर इसे दूर करना तो मुझे ही होगा,
मोती के दाने-सा बिखर गई है ज़िन्दगी ,
पर समेटना तो मुझे ही होगा ,
कदम काटो मेँ उलझ-उलझ जाते है मेरे ,
पर बढ़ना तो मुझे ही होगा ,
क्या होगा, मेरा ,कौन सा विकल्प अपनाऊ मै,
यह सोचना, तो मुझे ही होगा ।

– देवराज

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