आकाश का सृजित करना उसको
तडित-प्रचंड तडतडित भूमंड
नभ अम्बर में करता क्रदन
एक पंथ में जल रोदन
एक पंथ में चिर उन्मन
सुरे कम्पित – जड अन्तस
वीपिन कलाकृती वह देख
सुने क्रन्दित क्षितिज चेतन
कन‌कन का उष्मा आरेख
चकित चपला चंचल आक्रांत
चमक पड़ा वह धीरे से
शोभा के मंजीरे से
एक अंकित प्रकाश कि ज्वाल
धीर-अधीर तन प्रज्जवल
नीले नभ का प्रवाल
जलता प्रतिपल
उज्जवल
चमक पड़ा वह धीरे से
आभा के नभ नीले में
प्रभा स बल उसमें समतुल्य
उर्जा स उसमें सामर्थ्य
केवल नभ का प्रथ्य
एक अदृश्य
सत्य

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