माँ-बाप से ही मैं

माँ-बाप से ही मैं

मेरे माता -पिता मेरे लिए सबकुछ हैं अत: उनसे ही हूँ – मैं

माँ मेरी भक्ति हैं, तो पिता हैं मेरी शक्ति,
माँ मेरा प्यार हैं, तो पिता हैं मेरा खुमार,
माँ मेरी सृजना हैं, तो पिता हैं मेरी गर्जना,
माँ-बाप की शिक्षा से, मैं आज शिक्षक बना!

माँ ने मुझे गोद खिलाया, तो पिता ने कन्धो पर बिठाया,
घर – गाँव की समझ माँ ने, बापू ने संसारी ज्ञान सिखाया,
सृजनकर्ता ने प्यार किया, हुकुम दिया,जो कुछ सिखाया,
हर बात को सर आँखों रखा, तब जाके शिक्षक बन पाया!

– दिनेश कहार “समर्पित”

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