प्रेम

प्रेम

जब होना तुम प्रेम में
मत बताना इसे किसी सखी से
मत बताना अपने एकांत से भी इसे
कभी बांटना भी मत प्रियतम के साथ
बता देना बस आहिस्ता से खुद को
बताना बार बार उसके गर्दन का तिल
बताना बार बार खुद को उसकी मुस्कान

जब होना न तुम प्रेम में
सहेज के रख लेना भीतर ही इसे
संवारना धैर्य और आत्म विश्वास से फिर
घोल देना अपने वक्ष की तमाम हलचलें इसमें
चाहो तो अंदर ही पुष्ट होते देना इसकी चरम सीमा
और धीरे धीरे होती जाना सागर सी अचल

बस करना इंतज़ार, प्रेम को तुम तक भी आ पहुंचने का

प्रियंका स्वाधीन

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Priyanka Gupta

Project Manager

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  1. शानदार रचना

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