मधु की बूंदो में घुली है प्याली
मोदो में वह प्रवाह नहीं
लहराती है अट्टालिका न्यारी
अंचल में मंदिरा का दाग नहीं

अब तो बस एक निदान
पता लगाने का की कुछ सुराग
सुरों में भरो और सम्मान
फिर देखो दौड़ेेगे मधु अनुराग
तो फिर छलकेगी प्याली
तो फिर फिर होगा अभिप्यास
और फिर मंदिरा लय पर
भरमायेगे कुछ नये प्राणी

हो जायेगा प्रर्दाफास
जब जायेंगे बुझाने प्यास
मुखौटे से दिख जायेगा एक
दारूदोष लोभी अनायास

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One Comment

  1. Karan Kovind Kovind

    धन्यवाद

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