आज की वीरांगना

आज की वीरांगना

अदम्य साहस और निडरता,
है उनकी पहचान
हार कभी ना मानी,
लड़ी जब तक थे प्रान।
तेज ललाट सूर्य – सम,
अधरों पर निर्मल मुस्कान ।
धरे धैर्य लड़ती रही,
अंत में हो गई कुर्बान ।
है अद्भुत यह गाथा,
“निर्भया” ने पाया “छबीली” जैसा मान।

झुलस गया था चेहरा उसका,
झुका ना स्वाभिमान ।
खूब लड़ी अपनों के बीच,
है पाया ‘विश्व – सम्मान’
“लक्ष्मी” नाम सार्थक किया,
पायी मर्दानी जैसी शान।
है शत – शत नमन इन्हें,
कर जोड़ करूँ मैं प्रनाम।

– नेहा अवस्थी मिश्रा

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Golden Ray A Sunahri

-होम्योपैथिक चिकित्सक -रेकी मास्टर -कविता लेखन

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