Warning: Declaration of QuietSkin::feedback($string) should be compatible with WP_Upgrader_Skin::feedback($string, ...$args) in /var/www/wp-content/plugins/ocean-extra/includes/wizard/classes/QuietSkin.php on line 12

Warning: session_start(): Cannot start session when headers already sent in /var/www/wp-content/plugins/userpro2/includes/class-userpro.php on line 197

Warning: Cannot modify header information - headers already sent by (output started at /var/www/wp-content/plugins/ocean-extra/includes/wizard/classes/QuietSkin.php:12) in /var/www/wp-content/plugins/post-views-counter/includes/counter.php on line 292
जाको राखे साइयां मार सके ना कोय।। - हिन्दी लेखक डॉट कॉम
जाको राखे साइयां मार सके ना कोय।।

जाको राखे साइयां मार सके ना कोय।।

जिसको राखे साइयाँ मार सके ना। कोई।।
प्रातः कालीन का नजारा बेहद सुंदर और आकर्षक था,
हरी हरी घास अपने पूरे यौवन में लहलहा रही थी और ठंडी – ठंडी
हवा के झोंके सबको आनंदित कर रहे थे।
तभी भूख और प्यास से तड़पता हुआ एक गधा जंगल की ओर निकला और हरी घास को देखकर उसका मन प्रफुल्लित हो गया।
उसको ऐसा लगा कि आज मेरी भूख मिट जाएगी और जैसे ही वह घास की तरफ बढ़ा एक चीते के ऊपर उसकी नजर पड़ी वह उसे देखकर भयभीत हो गया और दूसरी तरफ देखा तो वहां पर बब्बर शेर नजर आया वह बहुत ही ज्यादा डर गया उसे लगा आज मैं नहीं बच पाऊंगा ।
मगर चीता और बब्बर शेर दोनों उसको खाने की सोच रहे थे,
तभी दोनों ने फैसला लिया कि एक को मार दिया जाए तो मुझे पूरा गधा खाने को मिल जाएगा,
तभी दोनों आपस में भिड़ गए और दोनों को गंभीर चोटे आई और दोनों घायल हो गए इस मौके का फायदा उठाते हुए गधा वहां से भाग गया और उसकी जान बच गई तभी कहते हैं।।
जिसको राखे साइयां मार सके ना कोई

श्याम जी गुप्ता फतेहपुर

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu