गद्य लेखन

छोटे बबलू के मन मे ढेर सारे प्रश्न थे। वह टेलीविजन पर वन्य प्राणियों को देखता था। स्कूल जाते हुए बाहर की दुनिया से भी उसका साक्षात्कार हो रहा था। उसे सोच मे डूबा देखकर दादी ने पूछा,
‘क्या बात है,आज कुछ हुआ है?’
‘मैं कुछ सोच रहा हूँ।’
‘हमें भी बता दो भइ, मिल कर सोच लेते हैं।’, दादी मुस्कुराने लगी।
बबलू की चिन्ता का विषय था, मनुष्य का जानवर के आधार पर वर्गीकरण। किसी को गधा, किसी को शेर, इसके साथ गाय, उल्लू आदि तो हैं ही।
दादी ने समझाया कि हर जानवर की किसी एक विशेषता के आधार पर लोगों का वर्गीकरण किया जाता है। सिंह जंगल का राजा माना जाता है,वह समूह मे रहता है। बहादुर और निडर लोगों को इसिलिए शेर कहते हैं। बाघ मे बहुत बल होता है। वह अकेला अपने दम पर शिकार करता है। अतः बलवान व्यक्ति की तुलना बाघ से की जाती है।
‘मगर दादी, शिकार तो शेरनियां ही ज्यादातर करती हैं।’
‘मेहनत कोई भी करें, नाम नेता का ही होता है,’दादी हंसने लगी,’ कलमैंने तुम्हें एक कहावत बताई थी,’
‘याद आई!जंग मे लड़ते सिपाही,नाम हो कप्तान का।’
बबलू उछलने लगा।
‘इस तरछ से उछल कूद करनेवाले को बंदर कहते हैं।’
दादी ने ही समझाया कि गद्हा बोझा ढोता है और दुलत्ती मारना भी जानता है। पर उसे अपनी क्षमता और सीमा का बोध नहीं, इसीलिए मंदबुद्धि इंसान को इस जानवर की उपमा दी जाती है।
इन्हीं बातों के बीच बबलू के माता पिता घर आ गए।
‘वाह! बहुत गपशप हो रही है।’
मम्मी की गोद मे चढ़ बबलू ने अपने नये ज्ञान को साझा कर लिया।दादी ने उसको समझ तो दिय था पर मन मे नवीन प्रश्न थे।
‘ पापा किस जन्तु मे इंसान जैसी खूबियाँ हैं?’
‘बेटा,मनुष्य इतना विचित्र प्राणी है कि कोई जीव उसकी तुलना नहीं कर सकता।’
पापा के इतना कहते ही बबलू बोल उठा,’ इसीलिए टीचर कहती है कि हमारी भूल की वजह से आज हम संकट मे है। जंगल काटकर जानवरों के साथ साथ हम भी एक दिन खत्म हो जायेंगे.’
-संगीता नागी

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *