नारी तुम जीवन की आधार शिला
तुम ही जग जननी हो
तुम ही लक्ष्मी, तुम ही दुर्गा
तुम ही सती सावित्री हो
तुम ही कोमल हृदय वाली
तुम ही ममता की मूरत हो
नारी तुम जीवन की आधार शिला
तुम ही जग जननी हो ।
कभी कोई हताश होता जीवन में
बन उसका दृढ़ संकल्प तुम,
तुम ही धैर्य बँधाती हो
जीवन को पुष्पों सा महकाती हो
नारी तुम जीवन की आधार शिला
तुम ही जग जननी हो ।
जब कोई बालक खेल-खालकर
घर पर वापस आता है,
अपनी ममता का आँचल फैलाकर
ले गोद में उसे श्रान्ति देती हो,
नारी तुम जीवन की आधार शिला
तुम ही जग जननी हो ।
प्रकृति का श्रंगार तुम ही हो
वसंत की बहार तुम ही हो
जीवन की खुशियाँ तुमसे ही
अलौकिकता का सार तुम ही हो
नारी तुम जीवन की आधार शिला
तुम ही जग जननी हो ।
– आनन्द कुमार

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