मां की रहमत

मां की रहमत

मां क्या होती है
अब तक थी अनजान।
अहसास हुई ममता
जब पायी निज सन्तान।।
तुम क्या कहती हो मम्मी??
तुम नहीं समझोगी!!
सोच लिया था कैसे मैंने!!
अब हूं बड़ी हैरान।
जान लेती हो कैसे?
मेरे मन के हर राज।
कहने से पहले ही पूरी होती,
दिल की सारी बात।।
एक सवाल सदा ही,
मन में करता था उत्पात,
मै क्या सोचूं, मै क्या चाहूं??
मां को कैसे था अहसास।।
ये पहेली मैंने आज है सुलझाई,
क्योंकि दो नन्हीं परियां,
मेरे जीवन में हैं आई।।
ईश्वर भी नतमस्तक जिसके आगे,
वो रहमत मैंने ‘मां’ तुझमें है पायी।

नेहा अवस्थी मिश्रा

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Golden Ray A Sunahri

-होम्योपैथिक चिकित्सक -रेकी मास्टर -कविता लेखन

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