चित्र लेखन संख्या-002 :

आभासी दुनियां का सच !

धीरा से फ़ोन पर हुई चैटिंग ने अकुल को इतना प्रभावित किया कि उसने बिना और जानकारी जुटाये धीरा को एक शाम गोमती रिवर फ्रंट पर मिलने के लिए बुला लिया। वह शाम रंगीन हो उठी और दो दिल एक बनने का निश्चय कर लिये। दिन, महीना साल बीतते बीतते छोटी छोटी बात पर दोनों को एक दूसरे से शिकवा शिकायतें होने लगीं।दोनों वर्किंग थे, दोनों की अपनी अपनी आइडेंटिटी अपने अपने ख़्वाब थे। एक शाम अकुल को पता चला धीरा धीरे धीरे अपने बास के क़रीब हो चली थी।बास उसे लेकर बिजनेस टूर पर जाने लगे थे। अकुल के एक दोस्त आर.पी.ने अकुल के शक पर मुहर लगा दी क्योंकि उसने बेंगलुरु में उन दोनों को एक नाइट क्लब में डांस करते देख लिया था। बस! अकुल ने धीरा के आते ही उस पर अपने संशय की अभिव्यक्ति कर दी।मानो विस्फोट हो उठा। धीरा भी अधीर हो उठी थी, इस रोज रोज की चिख चिख से।चीखती हुई बोली तो अब हमलोग अलग ही क्यों ना हो लें? असल में दोनों के शरीर ने अपनी भूख लगभग शांत कर ली थी। धीरा को अपने बास की निकटता कैरियर में ऊंची छलांग दे सकती थी। अगले दिन दोनों ने विलफुल डायवोर्स ले लिया। अकुल धीरा की प्रेम कहानी जो आभासी दुनियां से शुरू हुई उसका दि एंड हो गया। दोनों की राहें अलग अलग हो गई। धीरे धीरे अकुल डिप्रेशन में चला गया और एक दिन उसने सुसाइड कर लिया। उधर धीरा भी अपनी ख़ाम ख़याली दुनियां से एक दिन जब हक़ीकत की दुनियां में उतरी तो उसके बास ने भी उसे पे एंड यूज करके छोड़ दिया। आज धीरा पुत्तुपर्थी के एक आश्रम में नर्स के रुप में अपने जीवन के अंतिम पृष्ठ पर पहुंच चुकी है।

प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी

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