तुम फैल जाना

तुम फैल जाना

तुम फैल जाओ सभी दिशाओं में
कभी कुछ अखरेगा नही
मैं तुम्हे आश्रय दूगा
और तुम्हारे रास्ते निखार दूंग
जिससे तुम्हारी कल्पनाओ को पंख मिले
और वो फैल जाये मेरे मन के कोनो मे
हिमालय से श्रीलंका तक और
आकाश से पाताल तक तुम
फैल जाना और बादल बन जाना
बरसकर बिखर जाना नदियों में
और मिल जाना सागर से
जिसके प्रवाह में एक प्रेम विरह
जो तुम्हे मुझे मिलाने कि राह
– करन कोविंद

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This Post Has One Comment

  1. बेहतरीन भाव अभिव्यक्ति

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