मेरा ख्वाव मेरी हकीकत

मेरा ख्वाव मेरी हकीकत

एक दिन,
गली के मोड़ पर,
मिली मुझे वो अचानक।
है उसमें फूलों जैसी सुगन्ध,
नदियों सी है चपलता।
झरनों सा मतवाला पन,
औ सागर जैसी गहनता।
अंतस में भावों के मोती,
वाणी में ओजस्विता।
करुणा की है वो प्रतिमूर्ति,
रानी झांसी जैसी वीरता।
दिल में लिए हास – परिहास ,
नीर भरे नयनों में सजलता।
वरद हस्त माँ शारदे का उस पर,
वो है हिन्दी की कविता।।
वो है हिन्दी की कविता।।
– कल्पना

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