लड़की

लड़की

अपनी ही धुन में जो खोई रहती
ज़माने की हर नज़र में वो बदमिजाज़ लड़की

अपने ख्वाबों की लीक पर जो चलती
ज़माने के हर सफ़र में वो बदतमीज़ लड़की

किसी की चाहत जो उसके दिल में घर कर ले
ज़माने की हर ख़बर में वो बदकिरदार लड़की

लोगों की छोटी सोच के घने बादलों को जो चीर दे
ज़माने की हर नज़र में वो बदज़ुबान लड़की

ख़ुद के बेलौस सिफ़र वजूद पर जो फ़क्र करे
ज़माने की फ़िकर में वो बदगुमान लड़की

ज़माने की हर शय के इल्ज़ाम का नाम है लड़की
ज़माने के लिए कुछ और नहीं फ़क़त सामान है लड़की…

आरती ‘अक्स’

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Aarti Human

अब हाल-ए-दिल ना पूँछ कि ताब-ए-बयाँ कहाँ अब मेहरबान ना हो कि जरूरत ना रही....

Leave a Reply

Close Menu