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पतन - हिन्दी लेखक डॉट कॉम
पतन

पतन

लता की तबियत अचानक बिगड़ गई। श्रीधर के पसीने टूट गये। होम्योपैथी दवा की एक खुराक भर देने से इतना जबरदस्त रिएक्शन होगा यह तो उसने सपने में भी न सोचा था।
उनका इकलौता बेटा राहुल घर पर कम ही रहता था। पढ़ाई से ज्यादा उसका ध्यान अपने दोस्तों, खेलकूद, सैर सपाटे आदि में ही रहता था। रही सही कसर सोशल मीडिया के भूत ने पूरी कर दी थी। समाज के हर वर्ग की तरह राहुल भी इसकी चपेट में बुरी तरीके से फंसा हुआ था। श्रीधर ने आनन फानन में राहुल से उसके मोबाइल पे सम्पर्क साधने की भरसक कोशिश करी पर विफल रहे। कोई प्रतिउत्तर न पाकर उन्होंने पड़ोसियों की मदद से जैसे तैसे पड़ोस के एक नर्सिंगहोम में लता को दाखिल कराया।
लता का दिल एक गेंद की माफिक उछल रहा था। एक बार को तो लगा कि बस जिन्दगी की कहानी खत्म। उन्हें नर्सिंगहोम के डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज के लिये रेफर कर दिया। एकाएक उपजी इस इमरजेंसी में श्रीधर करे तो क्या करे। बीच बीच में राहुल से सम्पर्क साधने की कोशिश की जाती पर विफलता ही हाथ लगती।
मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलवाने पर भी लता की हालत में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा था। श्रीधर के साथ जो लोग अस्पताल में थे उनमें से किसी ने लता की फोटो क्लिक करी तो किसी ने वीडियो बनाया। उनमें से ही शायद किसी ने वो तस्वीरें और वीडियो आदि सोशल मीडिया पर डाल दिये।
राहुल को यह जानकारी सोशल मीडिया से ही हाथ लगी कि उसकी माँ की हालत बहुत नाजुक बनी हुई है और वह अपने जीवन की अंतिम सांसें गिन रही है। राहुल के अन्तर्मन ने उसे कहीं गहरे झकझोरा। अस्पताल की तरफ वो बेतहाशा दौड़ पड़ा। बीच रास्ते उसने अपना मोबाइल चेक करा तो देखा कि उसके पापा की न जाने कितनी मिस्ड कॉल्स और मैसेज उसमें पड़े हैं। रास्ते भर वो मन ही मन भगवान से अपनी मम्मी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता रहा।
लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। जब तक वो अपनी माँ के पास पहुचाँ वो अपनी अंतिम श्वास त्याग चुकी थी। दवाइयों के ढेर उनके बेड के समीप बिखरे पड़े थे। पिता की आंखों में आंसूओं के सैलाब भरे थे। उनकी दुनिया उजड़ चुकी थी। वो कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थे। राहुल हतप्रभ सा खड़ा था। माँ यूं उससे इतनी जल्दी बिछड़ जायेगी इसकी उसने कल्पना तक नहीं की थी।
माँ को और घर को उसने कभी समय ही कहाँ दिया था। उलझा रहता था वो तो हमेशा अपनी ही दुनिया में। आज वो सबकुछ खोकर मन ही मन रो रहा था। कोस रहा था सोशल मीडिया को। कैसे इसकी गिरफ्त में आकर उसके जीवन का सबसे अनमोल तोहफा ‘माँ’ उससे अब हमेशा हमेशा के लिए छिन चुका था। सोशल मीडिया ने उसके जीवन का और आज की पीढ़ी के समस्त युवाओं का पतन कर दिया था।

मीनल

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