सच कहता हूँ

सच कहता हूँ

सच कहता हूँ मैं
मेरी बात पर गौर करो
बुरी संगत में पड़कर
न अपने आप को बर्बाद करो ।
भूल चुके हो अपने आप को
कि कौन हूँ मैं
अरे इन्सान हो
इन्सानियत पर न वार करो ।
मनुज है तू ,असंवेदित प्राणी नहीं
क्या सो गया है तेरा जमीर
तेरी आँखों में पानी नहीं ।
जिस राह पर तू चल रहा है
सीना तानकर
क्या जानता है, तुझे ये ले जायेगा
किस मोड़ पर ।
इसलिए
सच कहता हूँ
मेरी बात पर गौर करो
इन्सान हो
इन्सानियत पर न वार करो ।।

– आनन्द कुमार

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Anand Kumar

शिक्षा- परास्नातक (प्राणि विज्ञान) वर्तमान में विषय-“जीव विज्ञान” के अन्तर्गत अध्यापन कार्य कर रहा हूँ । मुख्यत: कविता, कहानी, लेख इत्यादि विधाओं पर लिखता हूँ । इनके माध्यम से जीवन की निरन्तरता, मौलिकता, अपने विचारों एवं भावनाओं को रखने का प्रयास करता हूँ ।

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