रंग प्यार के

रंग प्यार के

ये प्यार के रंग भी अजीब है . . .
दिल के ढंग भी अजीब है।।
इंतजार में गुजारी पूरी उम्र जहाँ,
ख्यालों में डूबी रहीं निगाहें वहाँ ।।
तन्हा गुजारे लम्हें इंतजार के,
वो आके कह दे दो लफ्ज प्यार के।।
ये प्यार के रंग भी अजीब है.. . . . .
दिल के ढंग भी अजीब है।
उलफत नहीं इसको किसी से ,
ना ही किसी पर करार।
है तमन्ना सिर्फ इतनी,
हो जाये इक बार तो दीदार ।।
वो बैठे है खामोश ,
इज़हार-ए- इश्क होता नहीं।
करते है गुनाह -ए- मुहब्बत ,
सरे आम बयां होता नही ।।
ये प्यार के रंग भी अजीब है . . . .
दिल के ढंग भी अजीब है ।।

– नेहा अवस्थी मिश्रा –

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Golden Ray A Sunahri

-होम्योपैथिक चिकित्सक -रेकी मास्टर -कविता लेखन

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