झुकी हुई नज़रों ने बताया,
इश्क हमको भी हो गया है ।
धड़क रहा है दिल कुछ जियादा,
सिलसिला मोहब्बत का बन गया है ।
थोड़ा तकल्लुफ है गुफ्तगू में,
पैगाम- ए-उलफ़त अभी नया है ।
नींदें आँखों से उड़ गई हैं,
दिल का सुकून भी छिन गया है ।
फिजाँ में फैली है भीनी खुशबू,
गुलों का रंग भी नया नया है ।
चमन में आकार के तुम भी देखो,
बहारों का मौसम आ गया है ।
ख़्वाहिश है इतनी बना लो अपना ।
खुशी से दिल रौशन हो गया है ।
नसीब में अपने शामिल कर लो,
नसीब तुम से ही मिल गया है ।
झुकी हुई नज़रों ने बताया,
इश्क़ हमको भी हो गया है ।

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