किनारे किनारे

किनारे किनारे

मैं तो यूं ही जरा
घूमने निकली
तो सागर की उठती गिरती, शोर मचाती
लहरों का खेल देख
पलभर को ठहर गई
किनारे किनारे चल रही
समुंदर के पार पहुँचने का न कोई
रास्ता
न कोई मंजिल मुझे
मिल रही।

मीनल

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