तस्वीर

तस्वीर

जीवन की तस्वीरें उतारती
उतारती
देखो मैं खुद एक तस्वीर
बन गई
क्या सम्भव है क्या असम्भव
क्या सही है क्या गलत
क्या मुखर है क्या मौन
क्या शोर-शराबा है क्या निशब्द
क्या मौका है क्या धोखा
क्या सच है क्या झूठ
क्या सांझ है क्या भोर
क्या मान है क्या अपमान
क्या सौभाग्य है क्या दुर्भाग्य
क्या जीवन है क्या मृत्यु
क्या उत्सव है क्या शोक
क्या इस पार है क्या उस ओर
इन तमाम दुविधाओं के
भंवरजाल में फंस गई मैं
सावन की घटाओं सी घनघोर।

मीनल

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