उलझन

उलझन

यह समुन्दर है या
हिमालय पर्वत से पिघलती
हिमखंड का सैलाब
यह दुनिया जो भी हो
मैं तो मैं हूँ न
कहीं इन सब में इनकी
तरह ही उलझकर
मैं अपनी पहचान न खो
दूं।

मीनल

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