क्या फर्क

क्या फर्क

यह समुन्दर का किनारा
है
बर्फ की पहाड़ियों से ढका
कोई खूबसूरत नजारा है
या रेगिस्तान की
कण कण चमकती चमकीली
रेत
यह नाव है घोड़ा है
या ऊंट
मैं नाविक हूँ धावक हूँ
या मुसाफिर
यह जीवन है मृत्यु है
या इसके बीच की कोई
अवस्था
मैं कुछ भी सोचूं
कैसे भी जियूं
किसी भी बात से
क्या फर्क पड़ता है।

मीनल

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