प्यार की मंजिल

प्यार की मंजिल

तन बदन में
बिजली सी कौंध गई
तेरे सीने में उठती प्यार की एक
चिंगारी सी लहर जो मेरे
दिल के किनारे से टकरा गई
आसमां झुक गया
यह जमीन उठ गई
प्यार की बिछड़ी मंजिल जो इन्हें
बीच राह मिल गई।

मीनल

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