मझदार

मझदार

न मैं उस पार न इस पार
यह जीवन है कैसी
मझधार
जो रास्ता मिल रहा
मैं तो उसी पे चल रही
न किसी से कोई प्रतिस्पर्धा
न टकराव
न तकरार
हर सू फिजा के रंगों
सी बिखेरती बस
प्यार ही प्यार
बेशुमार कलियों सी खिलखिलाहट की फुहार
वफा की बूंदों की बौछार
सुगंधित फूलों की बहार।

मीनल

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