सूखे फूल

सूखे फूल

यह किसी पेड़ की डाली से टूटे सूखे फूल हैं
कागज के फूल नहीं
पतझड़ और बहारें देखी हैं
इन्होंने
बारिश के मौसम में
अमुवा की डाली पे पड़े झूले
की रिमझिम फुहार देखी है इन्होंने
जिन्दगी के उतार चढ़ाव देखे
हैं
जिन्दगी में अपनों को पराया
और परायों को अपना होता
देखा है इन्होंने
उम्रदराज हो गये हैं
किसी अल्मारी में धूल
में लिपटी किताब के पन्नों
के बीच रखे सूखे फूलों की तरह
भूला दिये गये हैं
मिटा दिये गये हैं
लेकिन इनके किरदार से ताजे
फूलों की खुशबू अब भी आती है
यह कोई कागज के पन्ने नहीं
जिन्हें पढ़कर फाड़ दिया
जाये या
एक कागज की कश्ती बनाकर
उनपे सूखे फूल रखकर इन्हें
बारिश के पानी में बहा दिया जाये
दरअसल यह वो फूल हैं जो ताजे हो या सूखे
किसी की दिल की बगिया में
बहार बन खिलते हैं
किसी के ख्वाबों में यादों का चाँद बन चमकते हैं
किसी की जिन्दगी में मीठी बातों की चिड़िया बन चहकते हैं।

मीनल

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