मरीचिका

मरीचिका

बस जो दिख रहा है
वही दृश्य है
लेकिन बहुत कुछ अदृश्य भी है
जो नहीं दिख रहा है
जो दृष्टांत है
उसे हम सच मान लेते हैं
जो सच नहीं भी हो सकता
जो अदृश्य है
उसका हमें ज्ञान ही नहीं है
जो नंगी आंखों से हमें दिखता है
वो अधिकतर झूठ है
भ्रम है
मरीचिका है
क्या सत्य है, क्या असत्य है
इसकी हमें पहचान नहीं है।

मीनल

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