ख्वाहिश

ख्वाहिश

आओ बैठो नजदीक मेरे,
पल दो पल सांसे मैं भर लूं।
महसूस करूं स्पर्श तेरा,
इस बार तो दिल से जी लूं।।

कुछ किस्से मेरे तुम सुनना,
कुछ बात तुम्हारी मैं सुन लूं।
हम दर्द बांट ले इक दूजे का,
तेरे कांधे पर ये सिर रख लूं।।

कल साथ तुम्हारा ना होगा,
ये लम्हे सीने में कैद कर लूं।
जब याद तेरी तड़पायेगी,
दीदार-ए-ख्वाब का सौदा कर लूं।।

फुरकत से तेरी इनकार मुझे,
कायनात से अब जंग कर लूं।
गर साथ तेरा मैं पा ना सकूं।
सीने में दफन हर अरमां कर लूं।

-नेहा अवस्थी मिश्रा

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Golden Ray A Sunahri

-होम्योपैथिक चिकित्सक -रेकी मास्टर -कविता लेखन

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