बड़ता जुल्म मेरे हिंदुस्तान में

बड़ता जुल्म मेरे हिंदुस्तान में

क्यों जुल्मों का शिकार हो रहा मेरा हिंदुस्तान ये,
गंगा जामजम का पानी सब हो रहा क्यों बेकार ये,
किसको अपना समजू में किसका अब दीदार करू,
अब तो सबके लिए बस रब से ही फरियाद करूं,
कभी देश दीवाना लगता था अब ये बेगाना लगता है,
क्यों ईश्वर के नाम पर बेगुनाह मारा जाता हैं,
क्यों कुछ हिंदू मुस्लिम दुश्मन बने है अपनी जानके ,
तबरेज जैसे बेगुनाहों को मारते रहते है ये हुए बड़ी शान से,
खत्म करो कहानी अब ये अत्याचारों की,
फिर से प्रेम की प्रीत जगाओ अपनी मीठी वाणी की,
क्यों ज़ुल्मो का शिकार हो रहा मेरा हिन्दुस्थान ये,

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