मुनि के पापा जैसे ही खेतों से हल जोत के आए , तो पास बैठी मुनि की माँ बोली –

अजी सुनों कल सुबह जल्दी उठना ,

मुनि का कल पास वाले स्कूल मैं दाखिला कराना है ,
जिस से आने वाले इसके भविष्य मैं, हमारी मुनि को किसी की कोई यह बात ना सुननी पड़े की इसके माता , पिता ने इसको नहीं पढ़ाया।

ओर तो ओर तुमने देखा ही होगा , कल वह पड़ोस वाली शांति दीदी ,
जब अपनी सहेलियों की जमा चौकड़ी के साथ बैठी थी तो , उनसे मेरे बारे मैं कह रही थी कि –

बहना वो जो मुनि की ममी है ना ,
उसको पढ़ना , लिखना बिल्कुल भी नहीं आता , उसके लिए तो काला अक्षर भैंस के बराबर है ।

वो तो भला हो मैंने सुन लिया।

वरना कल आने वाले भविष्य मैं मेरी मुनि को भी सब लोग यही बोलकर इसका उपहास करेंगे ।

हाँ मैं आपसे कह देती हूँ –
अब मैं आपकी एक बात भी नहीं सुनगीं ,
तुम्हें कल ही मेरी मुनि को स्कूल मैं दाखिला कराना है , यदि आप मेरी बात नहीं मानोगे तो मैं कह देती हूँ ,

मैं अपने मायके चली जाऊँगी , मुनि को साथ लेकर ।

तुम्हे तो पता ही है , मुनि के पापा –

आज के समय मैं पढ़ा लिखा होना कितना जरूरी है , मुनि को आज शिक्षित करना कितना जरूरी है ,
मैं नहीं चाहती कि मुनि भी हमारी तरह अनपढ़ रहे ।

मुनि के पापा ,
यह सब बात सुनकर बोले-

ठीक है भाग्यवान ,

मैं कल ही मुनि का दाखिला करा दूंगा ।

यह सब बात सुनकर पास खड़ी मुनि खुशी से फूले समा जा रही थी , उसको अपने सपनों को हकीकत मैं तब्दील करने का माध्यम मिल गया था ,

ओर वह माध्यम था शिक्षा ।।

✍️श्याम सिंह बिष्ट

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