घण्टिया

घण्टिया

गर यह घण्टिया किसी मंदिर के
अहाते में न होकर
किसी म्यूजियम, शोरूम या अन्यथा कहीं टँगी हो तो
क्या दिल में भगवान के प्रति
एक भक्ति भाव उत्पन्न नहीं होता
मन के मंदिर में स्थापित
भगवान की मूरत के दर्शन से
या दिल की धड़कन के राग को
सांस की लय के साथ मिलाकर
कोई भजन गाकर, ताली बजाकर,
हवा के झोंके से पेड़ की पत्ती के आले में घण्टी सी बजाकर
आस्था का एक दीया सा जलाकर
मनोरम छटा के दर्शन नहीं होते।

मीनल

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu