शादी , शहर या गाँव में ?

शादी , शहर या गाँव में ?

आज पान सिंह जी को अपना गांव छोड़े हुए एक लंबा अरसा हो गया था , वह सहपरिवार शहर में ही आकर बस गए थे उन्होंने यही शहर में अपना मकान बना रखा था ।
जब भी कोई गांव में शादी , विवाह या कोई अन्य कार्यक्रम होता वह अपने गांव उस कार्यक्रम में अवश्य अपनी भागीदारी करते जिससे रिश्तेदारी के ऊपर कोई बात ना आए ।
जिस जगह उनका गांव मैं उनका अपना पुश्तैनी मकान था उन्होंने वहां पर भी अपने पुश्तैनी मकान के अलावा और एक मकान अलग से लगा रखा था , यदि कभी गांव जाना हो तो भविष्य के लिए कोई दिक्कत ना आए ।
उनके उन मकानों से भी मासिक किराया अर्जित हो जाता था उत्तराखंड में आज भी ऐसे कई जगह है जहां पर ऊंचे शैक्षिक संस्थान व अस्पताल और पर्यटक स्थल उपलब्ध है ।
जिस कारण बाहर से आए हुए लोगों द्वारा उनको आय अर्जित हो जाती थी , पान सिंह जी का भी गांव ऐसे ही स्थानों में से एक स्थान में था ।

पान सिंह जी का एक बच्चा अभी 12वीं क्लास में पढ़ रहा है और दूसरे बच्चे की शिक्षा पूरी हो हो चुकी है, अब तो उसकी नौकरी भी विदेश में लग चुकी है ।
पान सिंह जी और उनकी धर्मपत्नी ने सोचा अब बच्चा बड़ा हो चुका है , फटा-फट इसकी शादी कर दी जाए तो मुझे भी घर के कार्यों में कुछ मदद मिल जाएगी और मेरा काम भी थोड़ा कम हो जाएगा । यदि बच्चा कोई कार्यरत बहु चाहेगा तो वह भी कोई बुरी बात नहीं है ।
पान सिंह जी ने गांव के अपने पंडित जी से सलाह मशवरा करके अपने बेटे के लिए लड़की देखना प्रारंभ कर दिया ।

आज विदेश से उनके बेटे का फोन आया – पान सिंह जी ने हालचाल पूछा , और बोले बेटा आज तुम्हें एक खुशखबरी देना चाहता हूं मैंने तुम्हारे लिए गांव से लड़की देखना आरंभ कर दिया है तुम अपनी मर्जी बताओ तुम शादी अभी करना चाहते हो या बाद में ,
पान सिंह जी का लड़का बोला – पापा ऐसी कोई बात नहीं है शादी तो करनी है ही आज नहीं तो कल , परंतु मैं गांव से शादी नहीं करना चाहता ।
पान सिंह जी ने सोचा शायद बच्चे ने विदेश में कोई लड़की देखी होगी इसलिए यह सब कुछ कह रहा है तो उन्होंने कहा कोई बात नहीं यदि तुम्हारी नजर में कोई लड़की है तो तुम हमें बताओ , हम उसी से तुम्हारी शादी करवा देंगे , तुम्हारी खुशी हमारी खुशी है बेटा ।

बेटे ने बोला – पापा ऐसी कोई बात नहीं है पर मैं गांव की लड़की और गांव से शादी नहीं करना चाहता ।
पान सिंह जी अपने बेटे की बात सुनकर सुन हो गए उन्होंने एक क्षण तो ऐसा सोचा जैसे वह कोई बुरा सपना देख रहे हो ।
उन्होंने अपने बेटे को समझाया कहां – बेटा गांव से ही तो हमारी जड़ है यदि तुम गांव से शादी कर लोगे तो इसमें क्या बुराई है , क्या तुम्हारी मां शहर की है , मैंने भी तो गांव से ही शादी की है,
तुम चाहोगे तो गांव से ही तुम्हारे लिए एक पढ़ी लिखी बहू ले आएंगे जो कि बाद में नौकरी भी कर सकती है ।

गाँव में हमारा सब कुछ है रिश्तेदार है , मकान है , शादी के समय कोई दिक्कत नहीं आएगी और तो और जहां हमारा गांव है वह भी शहरी इलाका है , अपने गांव की संस्कृति ओर वहाँ की जड़ो से जुड़े रहोगे , जब रिश्तेदारी में उठोगे , बैठोगे तभी तो रिश्तेदारों के बारे में जान पहचान होगी, क्या गांव की लड़कियां पढ़ी-लिखी या सुशील नहीं होती , यदि सभी नौजवान तुम्हारी सोच ही रखेंगे तो हमारा अपने मातृभूमि के प्रति क्या कोई फर्ज और बचा रह जाएगा ।
पान सिंह जी बोले – तुम गांव से शादी कर लो बाद में शादी का एक रिसेप्शन यहां शहर में भी दे देंगे , बाकी तुम्हारी मर्जी ।
पान सिंह जी का बेटा बोला – पापा आप शहर से ही कोई पहाड़ी लड़की देख लो , मैं शादी करूंगा तो सिर्फ शहर से ही गांव से नहीं ।
परंतु पान सिंह जी के बेटे ने अपने पापा की एक ना सुनी और वह शहर से ही शादी करने का इच्छुक था ।

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* क्यों आजकल की पीढ़ी के लोग गांव से शादी नहीं करना चाहते
* क्या गांव शब्द पिछड़ेपन की निशानी है
* क्या गांव से शादी उनके स्टेटस सिंबल से मैच नहीं करती
* क्या वहां सुविधाओं का अभाव है
* या शहर में होने वाली शादियों की चकाचौंध ने हमारी आंखों पर काली पट्टी बांध दी है
* या हम लोग अपने बच्चों को अपनी मातृभूमि की उपयोगिता ,वहाँ की जानकारी के बारे मैं नहीं बता रहे

* यदि हम अपनी जन्म भूमि , गाँव को इतना भी नहीं दे सकते तो हम अपने आपको –
देवभूमि कहने का अधिकार खो चुके हैं ।।
वैसी भी देवभूमि समान्य लोंगो के लिए नहीं है ।।

कहानी* सत्य घटना से प्रेरित है ।

लेख- श्याम सिंह बिष्ट

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Shyam singh bisht

कवि , लेखक डोटल गाँव उत्तराखंड

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