आज बुबु ,अमा एकांत अपने बड़े से घर के आंगन मैं बैठे हुए थे , आज उनके घर का आंगन सुनसान सा मालूम दिखाई पड़ रहा था।
मैं जैसे ही बुबु के घर पहूचा –

बुबु बोले – आ रे नातिया कदु दिनक छूटी लयर छे ?
मेरा जवाब- बुबु पैला , आम काछु ? दिखाई नी दिराय,
बुबु – नातिया , बायव हगे पाणी लियूह जै रै नह ।
मेरा जवाब- अच्छा , बुबु मि लै बार, पंद्रह दिनक छुटी ऐ रि ।
बुबु – ठीक हय , बाखई मैं ब्या छी , ये लिजी आनलेह ?
मेरा जवाब – होय बुबु , सब ठीक ठाक है गो ।
बूबू- ठीक हय ।
मेरा जवाब – बुबु – नानतिन , दाद , बोऊज , दिखाई नि दि राय ?
का जरी ?
बुबु – थोड़ा उदास होते हूऐ – अब तीगें के बतू नाति , ऊ नातिनागें ली बे लेह गो ।
मेरा जवाब- हाय की ले बुबु के झकर , मार , पथोंर , है छो के ?
बुबु – अरे नातिया कस बुलारण छे , तू ले य ब्याव पड़ी ,
मी अब बुड़याव क़ाव यस करूल के ।
मेरा जवाब – ना बुबु म्यर कुरणक यस मतलब नी छी ।
तली पनाह स्कूल तो बन्द है गी अब तो ऊ जुलाई मां खुलालल
नानतिन बड़ जल्दी लह गि ।
बुबु- अरे नातिया मिल तो कअ , गोपिह (बुबु जी का लड़के का नाम ) आलेए जबेए के करछे तली पनाह गर्म बहुत है रो , नातिन ओर बवाइर तब तक येए हापि रूनी , य पहारक ठंड़ , हाव ,पाण खै जाल ,
पर म्यर को सूनू ।
गोपियल लै बवारिक हाथ पकड़ छ फलअ , फलअ लैह पड़ी ।
मेरा जवाब – बुबु थोड़ा दिन रुक जा छीया तो भोलह हूं छी , तमर ओर आमक मन नातिनक मां लाग जा छि ।
उसी लै बार ,बार उण जारण कां है पाआं ।
इसी बीच अमा नह से पानि ले कर आ रही थी ।
मैंने कहाँ – अमा पैला तबियत ठीक छ: ?
अमा – ज्यूँ जा नातिया , होय ठीक छूउ । बैठ चहा पि जा लै ।
बुबु – ओर नातिया कस मौसम है रो ? तली पनाह ?
मेरा जवाब – बुबु गर्म है रो , आज कल ।
इसी बीच अमा चाय लाते हूऐ ,
अमा – अब नाती तिगें के बतू , मिलअ कअ गोपीही , नातिनग ओर बवाईर को येँ छोड़ जा , जब ईनार स्कूल खुल जाल तब अजेअ ईनूगूअ लिहूअ पर य गोपियल म्यर एक बात लै नि मानिअ ।
मेरा जवाब – पर अमा तमर बात किलेअ नि मानि ?
अमा – कूउ रो ईपनाह के कराल , तली पनाह इनर tution लगे दयूल किताब पराल , ओर तो ओर मिकेल अब रवाट लै नि बनन ।
अमा – अब नातिया तू बता हम ऊनोगें कसि रोक छि ?

इसी बीच बुबु बोलते हूऐ –
छोड़ नातिया इन बातोंगें , उनार नानतिन हापी करनी जे करनी ,
हम अब पाँच , छह साल ओर ज्यूँऊल, वै बाद घर आल या नि आल उनर मर्जी ।
तू चहा पी , चीनी ठीक हर छ चहा मै ?
मेरा जवाब – होय ।

मेने अमा बुबु को पैला किया और चल दिया , ओर सोचा क्या हमारे पास अपने मां-बाप के लिए इतना भी वक्त नहीं है कि हम एक, दो महीने उनके पास आकर रह सके ?

** शब्दों में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थी ।

** काल्पनिक कहानी ।।

लेख – श्याम सिंह बिष्ट

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