जीने दो

जीने दो

रंगबिरंगी फूलों का दीदार करना हो
तो घर से निकलकर किसी बाग में
टहल आओ
उन्हें पेड़ों की शाखों से तोड़
किसी फूलदान में मत सजाओ
यह कोई सजावट की या
उपहार में देने की चीज नहीं हैं
यह बेशकीमती हैं
अनमोल हैं
फूलों सा कोमल दिल रखते हो
तो इनका भी दिल रखो
इन्हें पेड़ों की शाखों से तोड़कर
इनके बाग, इनके निवास स्थान, इनकी जन्नत से जुदा करके
इन्हें समय से पहले मौत मत दो
जैसे खुद जीना चाहते हो वैसे
इन्हें भी जीने दो।

मीनल

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