सजा-ए-मौत

सजा-ए-मौत

यह फूल जीवित नहीं
मृत है
यह उसी पल मर गया
जिस पल तुमने इसे
पेड़ की शाख से तोड़ा
कुछ पल खिलता दिखेगा
फिर मुर्झा जायेगा
अपनी चंद पल की खुशियों
के लिये कोई किसी को
सजा-ए-मौत देता है क्या।

मीनल

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This Post Has One Comment

  1. Yeh to khilta gulab hai Esne murjhana nahi sikha.Sada khitey rahana eski fidrat hai… Saari bagiya esi se mehakati hai…

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