मैं पानी हूँ
सबकी प्यास बुझाता हूँ
अपने रक्त की एक एक बूंद से सबको सींचता हूँ
बंजर धरा की एक एक दरार को तरता जाता हूँ
मुझे एक अनमोल खजाने की तरह
संजो के रखो
जाने अंजाने यूं व्यर्थ न गवाओ
किसी के वालिदैन की तरह
मेरा भी कोई विकल्प नहीं
रेगिस्तान में भी पानी की कमी
न हो
कुछ ऐसा सोचो
मैदानी इलाके सूखा ग्रस्त हो
जाये
ऐसा अमानवीय कृत्य कदापि न करो
पानी की हर एक बूंद
तुम्हारे बहते लहू सी है
इसे नष्ट नहीं करना
यह एक दृढ़ संकल्प लो।

मीनल

Rating: 4.7/5. From 3 votes. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *