गगन मगन हो देख रहा है ||
धरणी की हरियाली को ||
रिमझिम बादल बरस रहा है ||
पवन हिलाये डाली को ||

गूँज रहे कलियों पर भँवरे ||
नाच रहे जंगल में मोर ||
नदी तालाब सब बाढ़ चुके है ||
दादुर मचा रहे खूब शोर ||
उपवन में पेड़ लगाने हेतु ||
खोद रहे वे क्यारी को ||
रिमझिम बादल बरस रहा है ||
पवन हिलाये डाली को ||

जोत रहे ट्रैक्टर खेतो को ||
कृषक लगा रहे है धान ||
उगने लगी खरीफ फसल है ||
बाजरा तिल उड़द अव ज्वार ||
बैठ खेत में खा करके खाना ||
दादा खिसकाते थाली को ||
रिमझिम बादल बरस रहा है ||
पवन हिलाये डाली को ||

मौसम मस्त मलंग बना है ||
यौवन भी इठलाता है ||
देख मोहिनी को मूरख चंद ||
प्रेम गीत खूब गाता है ||
नैना भी मचलाते अब तो ||
देख देख के लाली को ||
रिमझिम बादल बरस रहा है ||
पवन हिलाये डाली को ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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One Comment

  1. हिंदी लेखक परिवार को शम्भू नाथ कैलाशी की तरफ से तहेदिल से शुर्किया ||

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