मौसम -ए-इश्क

मौसम -ए-इश्क

मैं तपती धूप सा,

तू शीतल बयाल सी।

घुल गयी ज़हन में युं,

ज्यों चाशनी हो प्यार की ।।

रंगीनियत फ़िजा में घुली,

इत्र सी महक मेरे यार की।

बहकते लबों पर छा गयी,

नज़्में  तेरे  इकरार  की।।

सिमटी हुई सी चाँदनी,

रूमानियत है चांद की ।

महफिल में शमां जल उठी,

पतंगे  ने  जां  निसार की।।

-डॉ. नेहा अवस्थी मिश्रा

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Golden Ray A Sunahri

-होम्योपैथिक चिकित्सक -रेकी मास्टर -कविता लेखन

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