एक रंग

एक रंग

खौफजदा मैं गिरगिट
पल पल बदलते इंसानों के रंगों को
देखकर
हरे पत्तों में लिपट
छिप गई मैं इस दुनिया के बेमौसम
नजारों से
बाहर से जो भी दिखूं
एक रंग हो गई मैं तो
भीतर बादलों से उमड़ते
हजार रंग के ख्यालों से।

मीनल

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