ठंड रात में खेत सींचते हाथों की तुम गलन लिखो,
टूटी चप्पल सी कर पहनो, तब पैरों की जलन लिखो।

अंधियारे से उजियारे तक राहों में जो जला किया,
बिना तेल के उस दीपक की जलने वाली अगन लिखो।

जिनको पाना मुश्किल है सपने वो भी तो आते हैं,
कम साधन से ऊंचे सपनों को पाने वाली लगन लिखो।

भविष्य जब इतिहास पढ़ेगा प्रश्न हम ही से पूछेगा,
उत्तर उसको मिल जाए ऐसा साहित्यिक सृजन लिखो।

राष्ट्रभक्ति की प्रबल भावना जीवंत रहेगी सदियों तक,
वन्देमातरम वन्दे मातरम भारत माता को नमन लिखो।

विशाल कश्यप
गंजमुरादाबाद,उन्नाव
उत्तरप्रदेश।

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