जिन्दगी

जिन्दगी

थककर कुछ पल ठहर तो गया हूं
हरियाली की गोद में सो सा गया हूं
पर जिन्दगी थकने का नहीं
निरंतर चलते रहने का नाम है
यह न कोई रास्ता, न कोई मोड़,
न चौराहा, न ही कोई मुकाम है
यह निरंतर प्रयासों को प्रतिपादित
करते रहने का एक अभ्यास है
मां का आंचल मिले
या खुद का सहारा
तरुवर की छाया मिले
या मीठी वाणी की बहती धार का
किनारा
जिन्दगी मृग की छाल सी कोमल
है
तो समय को पल पल हरती
एक हथियार की तेज धार भी है।

मीनल

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu