प्रेम की कोंपल

प्रेम की कोंपल

यह जन्म है, पुनर्जन्म है या
कोई पिछला जन्म
यह जीवन है, मृत्यु है या
फिर मोक्ष
यह पल जो भी है
पर खूबसूरत है
यह काया की माटी से जो फूट
रही प्रेम की कोंपल
व्याकुल है
प्यासी है
यह पल जो जी जाये
वो ही ध्यानी है, ज्ञानी है, समभावी है,
महारथी है, फानी है
कोयल की मीठी वाणी सा झर झर
झरनों सा बहता निर्जल हवाओं का
पानी है
अतीत, वर्तमान और भविष्य के दृश्यों और पलों को
जोड़ती यही एक जीवन की
सुंदर कहानी है।

मीनल

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