विडम्बना

विडम्बना

क्या करें
क्या विडम्बना है
सबकुछ विचित्र है
शरीफ घर और बाहर सब जगह पिट रहे हैं और गुंडे बदमाशों की सब जगह जयजयकार हो रही है।

मीनल

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