पता नहीं

पता नहीं

मैं तुम्हारे दिल से दूर
तुम मेरे कितने करीब
रो रही तुम किस बात पे आखिर
कैसे पोछो तुम्हारी आंखों से झरते आंसू
कैसे खिलाऊं तुम्हारे लबों पे
खिलते कंवलों की लहलहाती झील
चांद आसमां में खिला है
अभी बादलों में छिप जायेगा
न जाने फिर दोबारा वो कब
नजर आयेगा
तुम्हारी परवाह है
दिल की गली का पता नहीं
मैं तुम्हारे से अगली किसी मुलाकात में
कोई सवाल करूं
उसका जवाब मिलेगा
पता नहीं।

मीनल

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