नीलकंठ

नीलकंठ

नीले आसमां से
नीली बारिश ने
सब कुछ नीला कर दिया
नीले रंग से सब नहला दिया
नीला रंग सब में भर दिया
नीले रंग से सब रंग दिया
नीला पानी
नीले पहाड़
नीले पेड़
नीला मन
नीला तन
शिव भक्ति सा बन पड़ा
आराधना का यह स्थल
नीलकंठ कण कण में विद्यमान
उड़ा दो हवाओं में गुलाबी गुलाल
की आस्था का रंग
पलभर आंखें मूंदकर
कहीं भीतर की दुनिया में
झांककर
हृदय पे हाथ रख
सच स्वीकार कर
खुली आंखों से फिर देखो
शिव दर्शन की नीली, निराली, नीलांबरी छटा
चहू ओर।

मीनल

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