हम है अथाह सागर

हम है अथाह सागर

सज धज के तुम खड़ी हो॥
ममता का लेके गागर॥
हम है अथाह सागर॥
तुमको समेट लेंगे॥

मूर्छित हुआ मेरा मन॥
मै हो गया तुम्हारा॥
तुम हंस के चली जाओ॥
हमको नही गवारा॥
फंसोगी नही भावर में॥
तुमको हम खीच लेगे॥

हाथो से सजाना बाग़ मेरी॥
होगा हमारा आना॥
तुम्हे खुश हम करेगे॥
मै हूँ तेरा दीवाना॥
जब आएगी कोई विपदा॥
उसको हम लील लेगे॥

बाहों में मेरी आओ ॥
हर राज़ को बताऊ॥
पल्लू को तेरे पकडू॥
हंस हंस के तुझे सताऊ॥
गिराने न देगे गम को॥
उसको हम भीच देगे…

कोमल बड़ा बदन॥
अंखिया बड़ी सुरीली॥
हंसते गिरे जो मोटी॥
तुझको लगे रसीली॥
खुशियों को तेरे दामन में॥
जी भरके के परोस देगे ||

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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