बेटिया ही ख़ुशी बेटिया ही खजाना

बेटिया ही ख़ुशी बेटिया ही खजाना

बेटिया ही ख़ुशी बेटिया ही खजाना ||
बेटियों को न यारो गर्भ में गिराना ||
इन्ही से है रिद्धि इन्ही से है सिद्धि ||
अपनी बेटियों को जम के पढ़ाना ||

इन्ही से कदर है इन्ही से है आदर ||
विपदा से तुम बेटियों को बचाना ||
इन्ही करती मंगल न होता अमंगल ||
ज्यादा बेटियों से न यारो लजाना ||

कुहुकती है घर में महकता है आँगन ||
सदा बेटियों की खुशियाँ सजाना ||
इन्हे खूब पढ़ाना इन्हे खूब लिखाना ||
आत्म निर्भर बेटियों को बनाना ||

हर काम में बेटी रहती है आगे ||
खाना खिलाती है सब को जगा के ||
संकट भी आता है इनको भगाना ||
सिखाती है सब को ये मुस्कुराना ||
इन्ही से है रिद्धि इन्ही से है सिद्धि ||
अपनी बेटियों को जम के पढ़ाना ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

This Post Has One Comment

  1. हिंदी लेखक के पूरी टीम को शम्भू नाथ कैलाशी की तरफ से तहेदिल से धन्यवाद

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